हम ज़हर बस तेरी खातिर ही पिया करते हैं,
दर्द का बोझ भी पलकों पे लिया करतें हैं.
न तो दौलत न तो शोहरत की तम्मना है हमें,
हम तो बस प्यार की खातिर ही जिया करतें हैं.
न हमें ज़ख्म की चिंता रही ना काटों की,
हम अपने ज़ख्म भी काँटों से सिया करतें हैं.
जाम पकडा दिया होठों से लगाकर उसने,
बोसे इस तरह लबों पे वो दिया करतें हैं.
यूँ तो उनको भी है कुछ शौक जफा करने का,
हमसे इजहारे वफ़ा ही वो किया करतें हैं.
दर्द का बोझ भी पलकों पे लिया करतें हैं.
न तो दौलत न तो शोहरत की तम्मना है हमें,
हम तो बस प्यार की खातिर ही जिया करतें हैं.
न हमें ज़ख्म की चिंता रही ना काटों की,
हम अपने ज़ख्म भी काँटों से सिया करतें हैं.
जाम पकडा दिया होठों से लगाकर उसने,
बोसे इस तरह लबों पे वो दिया करतें हैं.
यूँ तो उनको भी है कुछ शौक जफा करने का,
हमसे इजहारे वफ़ा ही वो किया करतें हैं.