दूज के चाँद पर भी लाली है,
है तेरा नूर या दिवाली है,
ज़ुल्फ़ अपनी ना खुली छोड़िये यूँ,
रात पहले ही बहुत काली है.
उसे जो दिल दिया गुमा देगी,
मेरी महबूब भोली भाली है,
हटो सीने में चुभ रहा है कुछ,
तुम्हारी कान वाली बाली है.
दिल से खेलोगे, चोट खाओगे,
फिर ना कहना कि दिल मवाली है.
अब तो महलों से तोड़ दो नाता,
घर हमारा भी खाली खाली है.
है तेरा नूर या दिवाली है,
ज़ुल्फ़ अपनी ना खुली छोड़िये यूँ,
रात पहले ही बहुत काली है.
उसे जो दिल दिया गुमा देगी,
मेरी महबूब भोली भाली है,
हटो सीने में चुभ रहा है कुछ,
तुम्हारी कान वाली बाली है.
दिल से खेलोगे, चोट खाओगे,
फिर ना कहना कि दिल मवाली है.
अब तो महलों से तोड़ दो नाता,
घर हमारा भी खाली खाली है.