यूँ ही बाँहों में भर लिया होगा,
भूल से प्यार कर लिया होगा.
चांदनी फ़ैल गई बिस्तर पे,
चाँद तकिये पे धर लिया होगा.
दाम सोने का कम हुआ है उधर,
तूने पीतल इधर लिया होगा.
बैठ कर दूर तुझसे सोचता हूँ,
आज पल्ला किधर लिया होगा.
ज़बान लड़खड़ा गई होगी,
हमारा नाम गर लिया होगा.
किताबे ज़ीस्त में कुछ भी न बचा,
हाशिया तक भी भर लिया होगा.
भूल से प्यार कर लिया होगा.
चांदनी फ़ैल गई बिस्तर पे,
चाँद तकिये पे धर लिया होगा.
दाम सोने का कम हुआ है उधर,
तूने पीतल इधर लिया होगा.
बैठ कर दूर तुझसे सोचता हूँ,
आज पल्ला किधर लिया होगा.
ज़बान लड़खड़ा गई होगी,
हमारा नाम गर लिया होगा.
किताबे ज़ीस्त में कुछ भी न बचा,
हाशिया तक भी भर लिया होगा.