हसीन रात कर या चुप हो जा,
प्यार की बात कर या चुप हो जा.
गरज़ता है सुबह से शाम तलक,
या तो बरसात कर या चुप हो जा.
अब कहाँ नीलकंठ होते हैं,
खुद को सुकरात कर या चुप हो जा.
माना पत्थर है, मैं तो पूजूंगा,
आरती साथ कर या चुप हो जा.
बना है सारथी जो अर्जुन का,
शंख का नाद कर या चुप हो जा.
आग चूल्हे की ना बुझ पाए कभी,
ऐसे हालात कर या चुप हो जा.
हैं ग़ज़लकार कई सारे यहाँ,
खुद को उस्ताद कर या चुप हो जा.
प्यार की बात कर या चुप हो जा.
गरज़ता है सुबह से शाम तलक,
या तो बरसात कर या चुप हो जा.
अब कहाँ नीलकंठ होते हैं,
खुद को सुकरात कर या चुप हो जा.
माना पत्थर है, मैं तो पूजूंगा,
आरती साथ कर या चुप हो जा.
बना है सारथी जो अर्जुन का,
शंख का नाद कर या चुप हो जा.
आग चूल्हे की ना बुझ पाए कभी,
ऐसे हालात कर या चुप हो जा.
हैं ग़ज़लकार कई सारे यहाँ,
खुद को उस्ताद कर या चुप हो जा.