बस उनके पास ही दिल की दवाई होती है,
कि जिनके पाँव में फटी बिवाई होती है.
मेहमान उन घरों में पूजे जाते हैं,
जिन घरों में टूटी चारपाई होती है.
उम्र के साथ ही आती है तजरबे कि मिठास
पके ना आम तो कच्ची खटाई होती है.
ज़हन में जागते रहते हो तुम भी साथ मेरे,
शबे विसाल से बेहतर जुदाई होती है.
बस इसलिए ही तो नामे वफ़ा से डरते हैं,
वफ़ा कि आड़ में ही बे-वफाई होती है.
बड़े जतन से सजाता है बाप मंडप को,
बस एक रात में बिटिया पराई होती है.
कि जिनके पाँव में फटी बिवाई होती है.
मेहमान उन घरों में पूजे जाते हैं,
जिन घरों में टूटी चारपाई होती है.
उम्र के साथ ही आती है तजरबे कि मिठास
पके ना आम तो कच्ची खटाई होती है.
ज़हन में जागते रहते हो तुम भी साथ मेरे,
शबे विसाल से बेहतर जुदाई होती है.
बस इसलिए ही तो नामे वफ़ा से डरते हैं,
वफ़ा कि आड़ में ही बे-वफाई होती है.
बड़े जतन से सजाता है बाप मंडप को,
बस एक रात में बिटिया पराई होती है.